पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- आर्थिक कार्य विभाग द्वारा प्रकाशित मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद अप्रैल 2026 में खाड़ी क्षेत्र से भारत को प्राप्त शुद्ध प्रेषण बढ़कर 16 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो विगत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 70% अधिक है।
परिचय
- वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत को प्राप्त प्रेषण बढ़कर 155.1 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया, जबकि FY25 में यह 135.4 अरब अमेरिकी डॉलर था। इस प्रकार इसमें वर्ष-दर-वर्ष 14.5% की वृद्धि दर्ज की गई।
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में प्रेषण की हिस्सेदारी FY25 के 3.6% से बढ़कर FY26 में 4.0% हो गई।
- पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण खाड़ी देशों से भारत आने वाले प्रेषण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंकाओं के विपरीत, प्रेषण प्राप्तियाँ सुदृढ़ बनी हुई हैं।
- प्रेषण में यह स्थिरता इसलिए बनी रही क्योंकि यह मुख्यतः क्षेत्र के श्रम बाजार की परिस्थितियों पर आधारित होता है तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), पोर्टफोलियो निवेश एवं ऋण प्रवाह जैसे अपेक्षाकृत अस्थिर वित्तीय प्रवाहों की भाँति अल्पकालिक संकटों से प्रभावित नहीं होता।
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत के बाह्य वित्तपोषण के स्रोतों में प्रेषण ऐतिहासिक रूप से सबसे स्थिर घटकों में से एक रहा है।
प्रेषण
- प्रेषण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति द्वारा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दूसरे देश में स्थित व्यक्तियों, विशेषकर अपने परिवार के सदस्यों, को धन भेजा जाता है।
- सामान्यतः यह धन विदेशों में कार्यरत व्यक्तियों, विशेषकर ब्लू-कॉलर अथवा कुशल श्रमिकों द्वारा भेजा जाता है।
- प्रेषण के माध्यम : प्रेषण निम्नलिखित माध्यमों से किया जा सकता है—
- बैंकों के माध्यम से।
- धन अंतरण सेवा प्रदाताओं के माध्यम से।
- डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्मों के माध्यम से।
- प्रेषण के प्रकार: लेन-देन के उद्देश्य के आधार पर प्रेषण दो प्रकार का होता है—
- अंतर्वर्ती प्रेषण : किसी अन्य खाते से घरेलू अथवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धनराशि का किसी खाते में स्थानांतरण अंतर्वर्ती प्रेषण कहलाता है।
- बाह्य प्रेषण: किसी देश से विदेश अथवा अन्य देश में धनराशि का स्थानांतरण बाह्य प्रेषण कहलाता है।
- प्रभाव : प्रेषण अनेक देशों के लिए आय का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
- यह आर्थिक स्थिरता को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को समर्थन प्रदान करता है।
- अनेक देशों में यह व्यापार घाटे के वित्तपोषण में भी सहायक सिद्ध होता है।
स्रोत: TH
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